बिहार पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का पैसा अब तक क्यों नहीं आया? चुनाव के बीच उठ रहे हैं बड़े सवाल

बिहार में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (Post Matric Scholarship) का इंतजार कर रहे लाखों विद्यार्थियों में अब नाराज़गी और बेचैनी बढ़ती जा रही है।
कई जिलों में कुछ छात्रों के खाते में राशि पहुँच गई है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी हैं जिनके खाते में अब तक एक रुपया भी नहीं आया।

चुनाव के बीच सरकार हर क्षेत्र में पैसे की बारिश कर रही है, लेकिन जो बच्चे वोट नहीं डाल सकते, उनके पैसे क्यों रोक दिए गए?

सरकारी सूत्रों और पोर्टल अपडेट के अनुसार देरी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं:

  1. जिला स्तर पर वेरिफिकेशन में देरी — कई संस्थानों ने अब तक छात्रों के दस्तावेज़ों का सत्यापन पूरा नहीं किया।
  2. आधार या बैंक अकाउंट सीडिंग की गड़बड़ी — कई छात्रों के खाते DBT से लिंक नहीं हैं।
  3. पोर्टल की तकनीकी समस्या — PMS Portal पर कई बार सर्वर एरर या “Processing” स्टेटस बना रहता है।
  4. चुनाव के कारण प्रशासनिक कार्य धीमे — इस समय ज़्यादातर अधिकारी चुनावी ड्यूटी में लगे हुए हैं, जिससे विभागीय कामकाज प्रभावित हुआ है।
  • लंबित फाइलों का फास्ट ट्रैक वेरिफिकेशन अभियान चलाया जाए।
  • जिन छात्रों के दस्तावेज़ों में छोटी गलती है, उन्हें सुधार का अवसर दिया जाए।
  • 18 साल से कम उम्र वाले छात्रों के मामलों को प्राथमिकता से सुलझाया जाए।
  • और सबसे ज़रूरी — पारदर्शी रिपोर्ट पब्लिक की जाए कि किस जिले में कितना भुगतान हुआ है।

छात्रवृत्ति कोई उपहार नहीं, यह हर छात्र का अधिकार है।
इसलिए इस लेख का मकसद सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि एक सामूहिक आवाज़ बनना है।
अगर आप भी चाहते हैं कि यह मुद्दा सरकार तक पहुँचे —
👉 इस लेख को शेयर करें
👉 सोशल मीडिया पर #BiharScholarshipDelay टैग करें

बिहार के कई गरीब परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च इन्हीं छात्रवृत्तियों से पूरा करते हैं।
किसी के कॉलेज की फीस बकाया है, किसी को परीक्षा फॉर्म भरना है, तो कोई किताबों के लिए इंतज़ार में बैठा है।

जहाँ कुछ छात्रों के खाते में भुगतान आ गया, वहीं कई छात्रों का पैसा महीनों से पेंडिंग है।
यह देरी न सिर्फ आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, बल्कि बच्चों के शैक्षणिक भविष्य को भी खतरे में डाल रही है।

यह सवाल अब ज़ोर पकड़ रहा है कि जो बच्चे 18 साल से कम हैं और वोट नहीं डाल सकते, क्या उनके साथ अनदेखी की जा रही है?
क्योंकि चुनावी समय में अन्य सरकारी योजनाओं का पैसा तेजी से जारी हो रहा है,
पर शिक्षा से जुड़ी यह मूलभूत योजना थम गई है।

“चुनाव प्रचार के लिए बजट तैयार है,
पर गरीब छात्रों की छात्रवृत्ति की फ़ाइलें अब भी फाइलों में धूल खा रही हैं।”

क्या शिक्षा सचमुच राजनीति से नीचे हो गई है?

कई छात्रों ने बताया कि महीनों पहले वेरिफिकेशन हो चुका है, फिर भी पेमेंट नहीं आया। किसी का ‘Under Process’, तो किसी का ‘Pending at District Level’ दिखा रहा है। अब सवाल सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही का है।

अगर आप भी बिहार पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लाभार्थी हैं, तो अपना स्टेटस ऐसे देखें:

👉 Official Portal: https://pmsonline.bih.nic.in
1️⃣ वेबसाइट खोलें
2️⃣ “Application Status” सेक्शन में जाएं
3️⃣ अपना एप्लिकेशन नंबर और जन्मतिथि डालें
4️⃣ यहाँ से आप जान सकते हैं कि आपका आवेदन किस स्तर पर अटका है

नोट: अगर “Sent to PFMS” दिख रहा है, तो आपका भुगतान जल्द जारी हो सकता है।
अगर “Verification Pending” लिखा है, तो अपने कॉलेज या DEO कार्यालय से संपर्क करें।

छात्रों की मुख्य माँगें इस प्रकार हैं:

  • लंबित आवेदन का त्वरित सत्यापन (Fast Track Verification) अभियान शुरू किया जाए
  • जिन छात्रों के दस्तावेज़ों में छोटी गलती है, उन्हें सुधार का अवसर मिले
  • 18 साल से कम छात्रों के मामलों को प्राथमिकता दी जाए
  • पेमेंट लिस्ट और देरी के कारण सार्वजनिक रूप से जारी किए जाएँ ताकि पारदर्शिता बनी रहे

“शिक्षा योजनाएँ किसी चुनाव या वोट बैंक की मोहताज नहीं होनी चाहिए,
ये बच्चों के सपनों से जुड़ी हैं।

अगर आप या आपके जानने वाले का पैसा अब तक नहीं आया है,
तो चुप न रहें।

👉 इस आर्टिकल को सोशल मीडिया पर शेयर करें

हर आवाज़ मायने रखती है —
क्योंकि जब हम सब बोलेंगे, तभी सरकार सुनने को मजबूर होगी।

सरकार से निवेदन है:
इस देरी को जल्द दूर किया जाए, ताकि कोई भी छात्र अपने सपनों से समझौता न करे।

शिक्षा वोट नहीं मांगती — बस समय पर हक़ चाहती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *